लखनऊ: उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक इन दिनों एक बार फिर ट्रांसफर-पोस्टिंग में घूसखोरी के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। बैंक के एक वरिष्ठ कर्मचारियों ने सीधे तौर पर मौजूदा बैंक प्रबंधन और स्पॉन्सर बैंक (बैंक ऑफ बड़ौदा) से डेपुटेशन पर आए अधिकारियों पर बैंक को लूटने का आरोप लगाया है।
जानकारों का कहना है कि स्पॉन्सरशिप बैंक में बदलाव के बाद, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में आंतरिक पारदर्शिता और जवाबदेही की स्थिति लगातार गिरती जा रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्विटर जैसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कर्मचारियों द्वारा लगातार उठाए जा रहे आरोपों को लेकर प्रशासन और सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जहां अन्य विभाग सोशल मीडिया पर किसी भी शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हैं, वहीं बैंक प्रबंधन सोशल मीडिया पर उठ रही आवाजों को अनदेखा कर रहा है।
बैंकिंग क्षेत्र के जानकार इसे संगठनात्मक विफलता मान रहे हैं और कह रहे हैं कि जब सभी यूनियनें निष्क्रिय हो जाएं, तब भ्रष्टाचार को खुला मैदान मिल जाता है।
