फाइल फोटो

केरोसिन वितरण को लेकर हर बार आपूर्ति विभाग द्वारा कोई न कोई निर्देश जारी किया जाता है। फिर भी गरीब वर्ग को इस कोरोना महामारी में केरोसिन (मिट्टी तेल) की उपलब्धता नही हो पाई है।

बदहाल विद्युत व्यवस्था में ग्रामीण आबादी रोशनी से वंचित रही है। इस बरसात के मौसम में विद्युत कटौती और भी बदहाल हो गई है। जिससे आम ग्रामीणो का हाल बदत्तर हो चुका है। कोरोना महामारी ने प्रवासी लोगो को अपने ग्रामीण क्षेत्र में आने को मजबूर कर दिया है।


बताते चलें कि जब केरोसिन वितरण न होने पर ग्रामीण आबादी के दुखदर्द को लेकर प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया गया था। जिससे निष्क्रिय भूमिका में रहा आपूर्ति विभाग हरकत में आया और होलसेलर आवंटन का पत्र जारी कर दिया गया। जिससे लोगो मे आस जगी कि अब केरोसिन का वितरण हो जाएगा। लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद भी आगे की कार्यवाही शुरू करवाने में आपूर्ति विभाग की हीलाहवाली बनी रही। होलसेलर आवंटन के बाद ही डिपो पर 12 हजार लीटर तेल मंगवा भी लिया गया। लेकिन जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा कोटेदार आवंटन जारी नही किया गया। हालांकि कोटेदारों का आवंटन उपजिलाधिकारी द्वारा किया जाता है। लेकिन हो सकता है जनपद के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी को इस बाबत कोई निर्देश ही न दिया गया हो।


इसी कड़ी में ज्ञात हो कि शासनादेश के निर्देशों के पालन में जनपद के जिम्मेदार अपनी कर्तव्यों को पूर्ण करने में बेहद लापरवाही बरत रहे है। जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा केरोसिन वितरण हेतू पात्र व्यक्तियों के सर्वे करवाने की बात कही गई। जबकि पूर्व में सर्वे के अनुसार नगर पंचायत के क्षेत्र को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्र पात्र परिवारों में केरोसिन वितरण जनवरी, फरवरी में किया जा चुका है। जिसमे पात्र गृहस्थी के 55.42% व अंत्योदय के 56.23% परिवारों के पास विद्युत कनेक्शन व गैस कनेक्शन पाया गया था। जिसके बाद इनके बाबत तेल का समर्पण कर दिया गया और इसी आधार पर बाकी बचे पात्र लोगो मे ही केरोसिन का वितरण किया गया था। अब इसी तरह के सर्वे पर नगरीय क्षेत्र में पहले ही परिवार को अपात्र होने पर वंचित कर दिया गया था लेकिन ग्रामीण आबादी को सर्वे के बाद पात्र परिवार में केरोसिन वितरण किया गया था। अब इस सर्वे के आधार पर ही पुनः ग्रामीण गरीब आबादी को केरोसिन से वंचित किया जा रहा है। एक ही सर्वे को जिम्मेदारों ने दो बार रिजल्ट दिया है। जनवरी में कुछ था और वर्तमान में कुछ और बताया जा रहा है। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि शासनादेश भी जनपद के अधिकारियों को कोई मायने नही रखता है। साथ ही आम गरीब आदमी के लिये कोरोना महामारी के दौर में नियमों को काफी सरल कर दिया गया है। जिससे आम जनता तक शासन के योजनाओं का लाभ मिल सके। जबकि जनपद के जिम्मेदार अधिकारी को आम गरीब की कोई चिंता नही है।

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