वाराणसी — काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के ट्रॉमा सेंटर ने स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ओपीडी में डॉक्टर-दर्ज डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली लागू कर दी है। इस पहल के साथ BHU देश का पहला लेवल-1 ट्रॉमा संस्थान बन गया है, जिसने ओपीडी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल रूप में परिवर्तित किया है।

अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव उत्तर भारत के सबसे व्यस्त चिकित्सा केंद्रों में से एक BHU ट्रॉमा सेंटर में रोगी-सेवा को आधुनिक, तेज और अधिक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

कैसे बदल गई है ओपीडी प्रक्रिया?

नई व्यवस्था में चिकित्सक मरीज का—पूरा मेडिकल इतिहास जांच संबंधी विवरण रोग निदान उपचार योजना सीधे इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) प्लेटफॉर्म पर दर्ज करेंगे। मरीजों को क्या फायदे मिलेंगे?

डिजिटल प्रणाली लागू होने से कई महत्वपूर्ण लाभ सामने आए हैं—

ओपीडी में इंतज़ार का समय कम हुआ काग़ज़ी फाइलों के खोने या अपठनीय होने की समस्या समाप्त मरीजों के पिछले सभी रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध इलाज के दौरान सटीकता और निरंतरता में वृद्धि विभागों के बीच समन्वय में सुधार ,रियल-टाइम डेटा शेयरिंग की सुविधा के कारण ट्रॉमा, ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोसर्जरी और पुनर्वास विभागों के बीच समन्वय पहले की तुलना में अधिक तेज और सुगम हो गया है। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में मूल्यवान समय की बचत के साथ निर्णय प्रक्रिया और भी प्रभावी हुई है।

BHU ट्रॉमा सेंटर की यह पहल देश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के उद्देश्य को गति देती है और चिकित्सा संस्थानों के लिए एक नया मानक स्थापित करती है।

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from ŦH€ अखंड भारत

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading