
आज दोपहर में टिड्डियों का 7-8 झुण्ड संत कबीर नगर के धनकटा तहसील में देखा गया जो निश्चित तौर पर किसान भाइयों के लिए चिंता का विषय है। टिड्डियों से लड़ने में प्रशासन तो हमारी मदद करेगा ही लेकिन कुछ आसान उपाय अपनाकर हम इनके हमले से अपने फसल को और बागीचों को बचा सकते हैं।
टिड्डियाँ ( Locusts )
टिड्डी एक कीट है जो चमकीले पीले रंग के होते हैं। इनका पिछला पैर लम्बा होता है। ये जब अकेले रहते हैं तो ज्यादा नुकसान नहीं करते लेकिन जब ये झुण्ड में रहते हैं तो बेहद खतरनाक हो जाते हैं और एक ही दिन में पूरा खेत खा जाते हैं । ये अपने वजन के बराबर खाना खाते हैं। टिड्डियां फूल फल पत्ते बीज यहाँ तक कि पेड़ों और पौधों की छाल तक को खा जाते हैं । इनका जीवन काल अमूमन 50 से 100 दिनों का होता है।
टिड्डियों से अपने फसल को बचाने के उपाय
* टिड्डियाँ ध्वनि से डरते हैं और नीचे नहीं बैठते। अगर आप अपने खेतों में ध्वनि करेंगे तो टिड्डियों का दल आपके खेतों में नहीं बैठेगा। ध्वनि करने के लिए आप ढोल-नगाड़ों, थाली-प्लेट, टीन, कनस्तर,लाऊड स्पीकर,या किसी भी प्रकार का तेज ध्वनि वाला यंत्र इस्तेमाल कर सकते हैं।
* शाम के समय आप अपने खेतो में आग जलाएं। आग देखकर टिड्डियों का दल आगे बढ़ जायेगा और इस तरह आप अपनी फसल को बचा सकते हैं।
* रासायनिक केमिकल का प्रयोग करके भी इनसे बचा जा सकता है। 5 भाग मेलथियान और 95 भाग पानी को मिलाकर घोल बनालें और अपनी फसल पर इस घोल का अच्छे से छिड़काव करें।
*मेलथियान के अलावा और कोई भी कीटनाशक जैसे क्लोरपिरिफास का भी छिड़काव किया जा सकता है।
*टिड्डियाँ अमूमन रात भर किसी न किसी खेत में रुकती हैं,अगर ये आपके खेत में रुक गयी हैं तो समझिए ये वहां ढेर सारे अंडे छोड़ कर जाएँगी। इनके उड़ जाने के बाद भी इन रसायनों का छिड़काव अवश्य करें ताकि इनकी संख्या न बढ़ने पाए।
*500 ग्राम NSKE या 40 मिली नीम के तेल को 10 ग्राम कपडे धोने के पाउडर के साथ 10 पानी में घोलकर छिड़काव करने से टिड्डियाँ आपके फसलों को नहीं खा पाते।
भारत सरकार का कृषि मंत्रालय तो लगातार टिड्डियों की मॉनिटरिंग कर ही रहा है लेकिन आप भी अपनी फसल और बागीचों को लेकर सावधान रहिये।
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