वाराणसी, 14 मार्च 2025
उत्तर प्रदेश के प्रमुख ग्रामीण बैंक बड़ौदा यू.पी. बैंक के वाराणसी जिले में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। बैंकिंग नियमों और नाबार्ड के दिशानिर्देशों के विरुद्ध, कई क्लर्क स्टाफ को वर्षों से एक ही शाखा में पदस्थ रखा गया है, जिससे न केवल बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं, बल्कि भ्रष्टाचार की आशंका भी गहराने लगी है।

बैंकिंग नियमों के जानकारों का कहना है कि किसी भी क्लेरिकल स्टाफ, विशेषकर प्रधान रोकड़िया (Head Cashier) को एक ही शाखा में अधिकतम पाँच वर्ष तक ही पदस्थ रहने की अनुमति होती है। इसके बावजूद, वाराणसी जिले में वर्तमान क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा कई कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रखकर लगातार पाँच वर्ष से अधिक समय तक एक ही शाखा में बनाए रखा गया है।
इस मामले पर बड़ौदा यू.पी. बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन (भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध) के महामंत्री श्री अम्बरीश कुमार राय ने मीडिया से बातचीत में क्षेत्रीय प्रबंधक पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा:
“यदि किसी ऐसे कर्मचारी द्वारा, जो पाँच वर्ष से अधिक समय से एक ही शाखा में पदस्थ है, कोई वित्तीय गबन या अन्य अनियमितता की जाती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रीय प्रबंधक की होगी। ऐसे में उन्हें भी उस गबन का बराबर का भागीदार माना जाएगा।”
श्री राय ने आगे कहा कि संस्था की छवि हमारे लिए सर्वोपरि है।
“हमारी यूनियन हमेशा कर्मचारी हित के साथ-साथ संस्था हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। यदि किसी एक व्यक्ति की मनमानी या पक्षपातपूर्ण नीति के कारण पूरे बैंक की साख पर आँच आती है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और हम इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे।”
🔍 आरबीआई और नाबार्ड के निर्देशों की अनदेखी
ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी कर रखे हैं, जिनमें यह कहा गया है कि:
किसी भी कर्मचारी को लंबे समय तक एक ही स्थान पर न रखा जाए। संवेदनशील पदों, जैसे कैशियर, प्रधान रोकड़िया आदि, पर कार्यकाल की समय-सीमा तय होनी चाहिए। संस्था के आंतरिक नियंत्रण और धोखाधड़ी-निरोध के लिए नियमित रोटेशन अनिवार्य है।
इसके बावजूद, यूनियन द्वारा आरोप लगाया गया है कि वाराणसी के क्षेत्रीय कार्यालय में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
💬 बैंक प्रबंधन की चुप्पी सवालों के घेरे में
इस पूरे मुद्दे पर बैंक के उच्च प्रबंधन की चुप्पी भी संदेह उत्पन्न कर रही है। कर्मचारियों और यूनियन नेताओं का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न तो किसी जांच की घोषणा हुई है, न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई है।
⚠️ संभावित परिणाम और अगला कदम
यदि इस तरह की अनियमितताएँ बिना रोक-टोक जारी रहीं, तो:
कर्मचारी असंतोष और संस्था के भीतर पक्षपात की भावना बढ़ेगी। भ्रष्टाचार और गबन की आशंका और अधिक मजबूत होगी। बैंक की साख पर सीधा असर पड़ेगा।
यूनियन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर ट्रांसफर नीति का पारदर्शी क्रियान्वयन नहीं किया गया, तो वह आंदोलनात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
ग्रामीण बैंकों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमबद्धता के बिना संस्था का भरोसा कमजोर होता है।
बड़ौदा यू.पी. बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा उठाया गया यह मुद्दा न केवल एक जिले की समस्या है, बल्कि पूरे प्रदेश में बड़ौदा यू पी ग्रामीण बैंक की कार्यप्रणाली पर विचार करने का एक अवसर भी है।
🔴 ऐसी जानकारी मिली है कि इससे पूर्व में देवरिया जिले में भी क्षेत्रीय प्रबंधक की लापरवाही से करोड़ों का गबन हो चुका है। अब देखना यह है कि बैंक प्रबंधन और नाबार्ड इस गंभीर मसले पर क्या कदम उठाते हैं।
📍 रिपोर्ट – वाराणसी ब्यूरो
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