वाराणसी।

धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी ने एक बार फिर पूरे देश में नई मिसाल कायम की है। काशी अब केवल अध्यात्म और परंपरा की नगरी ही नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा (Green Energy) और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी का प्रतीक भी बन गई है। हाल ही में वाराणसी देश का पहला शहर बन गया है, जहाँ रेल की पटरियों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।

परियोजना की शुरुआत

भारतीय रेल और उत्तर प्रदेश न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (UPNEDA) के सहयोग से इस अभिनव योजना की शुरुआत की गई है। पहले चरण में वाराणसी रेलवे स्टेशन और उसके आसपास की पटरियों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।

इन सोलर पैनलों से उत्पन्न बिजली का उपयोग मुख्य रूप से—

रेलवे स्टेशन की लाइटिंग और सिग्नलिंग सिस्टम, प्लेटफॉर्म पर लगे पंखे और लाइटें, और आसपास की रेलवे कॉलोनियों में किया जाएगा।

कितनी होगी ऊर्जा उत्पादन क्षमता?

प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन 500 किलोवाट से अधिक बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। अनुमान है कि इससे प्रतिवर्ष क़रीब 10 लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में वाराणसी मॉडल को अन्य बड़े शहरों और जंक्शनों पर भी लागू किया जाएगा।

क्यों है खास?

यह परियोजना इसलिए भी विशेष है क्योंकि अब तक सोलर पैनल प्रायः छतों, खाली मैदानों या बिल्डिंग की दीवारों पर लगाए जाते थे। लेकिन पहली बार देश में सीधे रेल की पटरियों पर पैनल लगाकर ऊर्जा उत्पादन किया जा रहा है।

पटरियों पर पैनल लगाने से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। धूप का सीधा उपयोग होगा और रेल के खाली क्षेत्र का सर्वोत्तम उपयोग संभव हो सकेगा।

प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है। ऐसे में यहाँ हरित ऊर्जा और स्मार्ट सिटी की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में काशी को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कई आधुनिक सुविधाएँ मिली हैं, और अब यह परियोजना उसकी प्रतिष्ठा को और बढ़ा रही है।

स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया

वाराणसी के नागरिक इस पहल को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि काशी अब केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा की मिसाल भी बन चुकी है।

वाराणसी ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में नई दिशा दिखाते हुए यह सिद्ध कर दिया है कि परंपरा और आधुनिकता का संगम ही वास्तविक विकास है। रेल पटरियों पर सोलर पैनल लगाने की यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगी, बल्कि आने वाले समय में भारत के ऊर्जा परिदृश्य को भी बदलने में योगदान करेगी।

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